अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
06.17.2016


आश्रम में स्त्रियाँ

आश्रम में
आश्रय लेने आती है
समाज की वह नारियाँ
जिसे ठुकराया है परिवार ने
जिसे ठुकराया है समाज ने
जिसे ठुकराया है पति ने

सुबह से शाम तक खटती है
किसी मशीन की तरह
ठीक वैसे ही
जैसे वह करती थी काम
परिवार में रहकर

उसे आती होगी याद
अपने ही घर की/परिवार की
बच्चों की/पति की
देखा था जो सपना
जीवन भर जीने का
परिवार के साथ
टूट गये, बिखर गये
वे रिश्ते, वे सपने सारे
जीवन के

अब सिर्फ़
देती है बयान
आँखों के आँसू
उनकी याद आने की।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें