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05.03.2012
 

उदास वक्त में मैंने
सुरजीत पात्र
मूल भाषा - पंजाबी, अनुवाद - निर्मल सिद्धू


उदास वक्त में मैंने अपनी डायरी न लिखी
सफेद कागज़ों पे मैंने मैली ज़िन्दगी न लिखी

लिखी किताब और आत्मकथा कहा उसको
पर उस किताब में भी अपनी जीवनी न लिखी

कोमल फूलों को जब भी कभी ख़त लिखा
तो अपने तपते हुये राहों की बात कभी न लिखी

चिराग़ लिखा बनाकर चिराग़ की मूरत
पर उस चिराग़ की किस्मत में रौशनी न लिखी

जो उड़ती जाए हवाओं में पक्षियों की तरह
बहुत मैंने लिखा पर ऐसी उड़ान ही न लिखी

बहुत जो लिखा गया, मैं भी वही लिखता रहा
वो बात जो थी आजतक अनलिखी न लिखी

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