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| 12.26.2007 |
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उदास वक्त में मैंने |
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उदास वक्त में मैंने अपनी डायरी न लिखी
सफेद कागज़ों पे मैंने मैली ज़िन्दगी न लिखी लिखी किताब और आत्मकथा कहा उसको पर उस किताब में भी अपनी जीवनी न लिखी कोमल फूलों को जब भी कभी ख़त लिखा तो अपने तपते हुये राहों की बात कभी न लिखी चिराग़ लिखा बनाकर चिराग़ की मूरत पर उस चिराग़ की किस्मत में रौशनी न लिखी जो उड़ती जाए हवाओं में पक्षियों की तरह बहुत मैंने लिखा पर ऐसी उड़ान ही न लिखी बहुत जो लिखा गया, मैं भी वही लिखता रहा वो बात जो थी आजतक अनलिखी न लिखी |
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