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| 12.26.2007 |
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क्या जवाब देंगे हम |
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क्या जवाब देंगे हम, हश्र के दिन खुदाया तुझको तड़प अय दिल कि तड़पने का अपना ही मज़ा है देख तो सही जाकर, इश्क़ में मुब्तलाँ लोगों को समन्दर या तुफ़ाँ का डर नहीं, डर तो तब होता है दिल की दहलीज़ पार कर, अन्दर गये तो जाना जब चली आती है तेरी याद मौसमे बरसात में अच्छा है, हो जायें ग़ाफ़िल दुनिया के रंजोगम से ‘निर्मल’ |
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