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05.03.2012
 
अय शहीद, तुझे सलाम
निर्मल सिद्धू

अय शहीद तुझे सलाम
अय शहीद तुझे सलाम
तेरी क़ुर्बानी को सजदा
तेरी निष्ठा को प्रणाम
                 अय शहीद तुझे सलाम
 
लक्ष्य आज़ादी का लेकर
तुम जगत में आये थे
स्वतंत्रता के दीप उस पल
घर घर में जगमगाये थे
तुम न आते जाने कब तक
मेरा देश रहता ग़ुलाम
                 अय शहीद तुझे सलाम
 
राष्ट्र प्रेम का गीत तूने
क्रान्ति की धुन पे गाया था
देख सामने मौत आती
किंचित न डगमगाया था
जीकर जो कोई कर न पाया
मर कर किया वो काम
                 अय शहीद तुझे सलाम
 
जीवन भले छोटा सा था
कार्य तेरे थे अति बड़े
देख तेरा तेजस्वी चेहरा
फ़िरंगी रह जाते थे खड़े
दासता की ज़ंजीर तोड़ी
पीकर शहीदी जाम
               अय शहीद तुझे सलाम
 
राष्ट्रभक्ति की चिंगारी से
मशाल तूने जो जलाई
उसकी रोशन राहों पे चल
आज़ादी की देवी घर में आई
क़तरा क़तरा तेरे लहू का
आया वतन के काम
               अय शहीद तुझे सलाम
 
तेरी शहीदी का परन्तु
मूल्य किसने है चुकाया
अधर्म और आंतक ने मिल
आज तुझको है भुलाया
तुम शहीदों का इन्होंने
नाम किया बदनाम
              अय शहीद तुझे सलाम
 
हे युगपुरुष हे युगप्रवर्त्तक
फिर से है तेरी ज़रूरत
देश मेरा फिर से चाहे
वैसा ही प्रेम वैसी मुहब्बत
क्या ही अच्छा हो जो गूँजे
हर सू तेरा पैग़ाम
            अय शहीद तुझे सलाम


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