रात भर का
जला
थका हारा
दिया
सूर्य की प्रतिक्षा में,
देखने लगा
पूरब दिशा में,
इस लम्बे
सफ़र से
टूट चुका
हूँ मैं,
जितनी
शक्ति थी मेरी
उतना जल
चुका हूँ मैं,
बुझने को
है
मेरी काया,
मिटने को
है
मेरा
अस्तित्व
मेरी छाया,
अब तो
चले आओ
तुम
जीवन प्रकाश ज़रा
दे जाओ
तुम,
बस यही एक
सहारा है
इसीलिये
तुझे
पुकारा है,
ओ प्रकाश
के मसीहा
अब तो उदय
हो जाओ!!