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04.29.2012

स्विटज़रलैंड में शातो द लाविनी की अनोखी अनुभूतियाँ

मैं और मेरे पति श्री महेश चन्द्र द्विवेदी स्विटज़रलैंड में "शातो द लाविनी" में २१ दिन के कोर्स के लिये सन्‌ २०१० के अगस्त माह में गये थे। वहाँ पर कुछ लोगों के अद्भुत अनुभवों को सुनने का अवसर मिला। वहाँ मुझे भी कुछ अनोखी अनुभूतियाँ हुईं जिन्हें मैंने लेखनीबद्ध कर लिया। वे सब घटनायें निम्नलिखित हैं-
२ अगस्त २०१० को शातो में पब्लिक रीडिंग का आयोजन था। वहाँ पर मेरा परिचय दस वर्ष पूर्व शातो में रेज़ीडेन्ट रही मिसेज़ एलेन हेन्सले से हुआ। वह जर्मनी कवयित्री सूज़ेन से बात कर रही थीं। यह जानकर कि मैं रौवोल्ट नामक प्रमुख कक्ष में रह रही हूँ, वह मेरे समीप आकर बड़ी आत्मीयता से मिलीं। अचानक उन्होंने मुझसे प्रश्न किया-

"आपको शतो में कुछ अनोखा अनुभव तो नहीं हुआ?"

मेरे उत्तर देने के पूर्व ही एलेन अत्यन्त उतावली होकर बोलने लगीं-

"मैं भी उस कक्ष में अपने पति के साथ रही थी। जेन के कक्ष में अभी भी उनकी व्यक्तिगत वस्तुएँ रक्खी हैं। एक बार मेरे पति साइड रूम की दीवार पर हाथ टेक कर खड़े होकर सोफ़ी से बात कर रहे थे तो अचानक दीवार खुल गई। यह देखकर हम लोग चकित रह गए कि वहाँ जेन का कुछ व्यक्तिगत सामान रक्खा था।"

एलेन ने सूज़ेन के साथ मेरे कक्ष में आने की अनुमति माँगी। अपनी पुरानी स्मृतियों को ताज़ा करते हुए उन्होंने एक दुछत्ती का द्वार खोलकर अन्दर दिखाया- वहाँ पर दो दफ़्ती के डिब्बे रक्खे थे, जिनमें सम्भवतः जेन का सामान था। मैंने एलेन को डिब्बे खोलने को मना किया कि किसी का सामान बिना अनुमति न खोलें।
एलेन ने मुझे बताया -

"शातो में आत्माओं का निवास है। उन्होंने अपने समय की एक घटना सुनाई। इस कक्ष के समीप वाले बगल के कक्ष में जो रेज़ीडेन्ट रहती थी उसने मुझे यह बात बताई थी कि- " एक बार रात को उसकी नींद खुल गई। उसने देखा कि कमरे में कोई स्त्री खड़ी होकर शेल्फ़ में रक्खे हुए प्यारे- प्यारे कुत्तों के डेकोरेशन पीसेज़ को बार-बार गिन रही है।" एलेन ने बताया कि वे कुत्ते जेन को बहुत प्रिय थे। हो सकता है कि किसी ने उन्हें छुआ हो या लेने की कोशिश की हो। लाइब्रेरी में भी ऐसा लगता है जैसे किसी ने पुस्तकें इधर-उधर की हैं। एलेन ने यह भी बताया कि एक बार एक रेज़ीडेन्ट ने रात में एक आर्टिकल लिखा और सो गया। सुबह जब वह सोकर उठा तो उसने देखा कि उसमें करेक्शन किये गये हैं, इनमें लेडिग द्वारा किये गये करेक्शन्स से समानता थी। एलेन को यह विश्वास था कि ये करेक्शन लेडिग की आत्मा के द्वारा किया जाता है। उनके अनुसार शातो में जेन एवं लेडिग की आत्मा की उपस्थिति अनुभव की जाती है, वे किसी को हार्म नहीं करते हैं।" समय नहीं था अन्यथा उनके पास अनेकों घटनाओं के साक्ष्य भी उपलब्ध थे।

एलेन ने मुझसे जानना चाहा कि मैंने कक्ष में किसी प्रकार की कोई अनुभूति की या कुछ देखा- सुना? मैंने बताया कि मैंने कुछ अनोखी बात तो नहीं देखी परन्तु दो दिन पूर्व जब रात में वर्षा हुई थी तब हम लोग खिड़की बन्द करके सोये थे परन्तु हमें प्रातः खिड़की खुली मिली। उसके कुन्डे प्राचीन नमूने के थे और बहुत मज़बूत थे। मैंने अपने पति से पूछा कि "क्या खिड़की आपने खोली है?" उन्होंने नकारात्मक उत्तर दिया इस पर मुझे आश्चर्य हुआ था। कल प्रातः दस बजे मेरे पति कम्प्यूटर पर कार्य कर रहे थे और मैं बेड पर बैठकर पूजा कर रही थी कि अचानक कक्ष के मुख्य बन्द द्वार से एक तेज़ आवाज़ ऐसी आने लगी जैसे तेज़ हवा चल रही हो और छोटे छेद से अन्दर प्रवेश कर रही हो-डरावनी "हू-हू" की सी आवाज़ थी। उस कक्ष में मुख्य प्रवेश द्वार पर दो मज़बूत दरवाज़े लगे हैं जिनमें कोई छेद नहीं था। हम समझ नहीं सके कि यह कैसी आवाज़ थी। कक्ष के बाहर गैलरी है और दाहिनी ओर दरवाज़ा खुलने पर छोटी बाल्कनी है। हमने सोचा कि हो सकता है कि इला या मौरेल ने दरवाज़ा खोला हो और उधर से तेज़ हवा आई हो। हालांकि जिस कोण पर दरवाज़ा है, तेज़ हवा अन्दर आने पर भी इस कक्ष में प्रवेश नहीं कर सकती है। दिन का समय था अतः मुझे भय तो नहीं लगा परन्तु कुछ अजीब अवश्य लगा। मैंने मन ही मन में जेन को अपने कक्ष में रहने की अनुमति देने के लिये और अपनी वस्तुएँ उपयोग करने की सुविधा देने के लिये धन्यवाद दिया। यह चाहें मेरे मन का भ्रम ही हो परन्तु यह सच है कि इसके बाद सब शान्त हो गया। मैंने एलेन से प्रश्न किया कि क्या उन्होंने वहाँ स्वयं कुछ देखा है तो उन्होंने स्वीकारोक्ति में सिर हिलाया और बताया कि लम्बी कहानी है जल्दी में नहीं सुनाई जा सकेगी। एलेन ने एक बात और बताई-

"फ़्रांस में लोग आत्मा और सुपरनेचुरल एक्सपीरिएन्सेज़ में विश्वास करते हैं। एक लेडी, उसका नाम मुझे याद नहीं रहा, ने ई-मेल पर मेसेज छोड़ा था कि यदि किसी को इस प्रकार के अनुभव हुए हों तो मुझे लिखे। कई लोगों ने उसके पास अपने अनुभव भेजे थे। उसने सबका संग्रह किया है।"

क्या जेन वहाँ आई थीं?

अरे एक ख़ास बात तो बताने को रह ही गई। कल रात डिनर के पश्चात जब हम लोग अपने कक्ष में आये तो मेरे पति तो कपड़े बदल कर सोने के लिये लेट गये पर मैं सामान सुव्यवस्थित करने लगी और कुछ देर बाद बिस्तर पर लेटने गई। मेरे पति दाहिनी ओर सो रहे थे और मैं बाईं ओर लेट गई। जब से मैं रोवोल्ट एवं जेन के व्यक्तिगत कक्ष में रुकी थी और उनकी व्यक्तिगत वस्तुओं का उपयोग कर रही थी तब से ही मुझे एक अनोखी अनुभूति होती थी जिसका मैं वर्णन नहीं कर सकती।- यह पूर्ण रूप से भय की स्थिति नहीं कही जा सकती। न जाने मुझे ऐसा क्यों लगता था कि मैं रोवोल्ट दम्पति की वस्तुओं का प्रयोग करके कुछ अनधिकार चेष्टा कर रही हूँ पर तुरन्त ही ध्यान आता कि जेन के अपने बच्चे नहीं थे और यह शतो उन्होंने अत्यन्त प्यार से रेज़ीडेन्सी में आने वाले साहित्यकारों को उपलब्ध कराया है। यह सोचकर मेरे हृदय में जेन के प्रति एक आत्मिक लगाव उत्पन्न हो गया था। यह सुनकर कि जेन अन्तिम दिनों में बहुत एकाकी थीं और अन्तिम समय उनकी नौकरानी भी उनके पास नहीं थी, उनकी मृत्यु का पता चलने पर वह अधिकारियों को सूचित करके वहाँ से चली गई थी, - मेरा हृदय जेन के प्रति करुणा एवं आत्मीयता से भर गया था। आज भी जब मैं बिस्तर पर लेटी तो मैंने जेन को प्यार से स्मरण करते हुए उन्हें मन ही मन धन्यवाद दिया जिनकी अनुकम्पा से हमें इस राजसी आतिथ्य के साथ स्विटज़रलैन्ड में २१ दिन व्यतीत करने का सुअवसर मिला। इसी समय मुझे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे मेरे पलंग पर मेरे बाईं ओर कोई आकर बैठा हो। उस समय न तो पंखा चल रहा था न हवा चल रही थी। बाईं ओर खिड़की भी नहीं थी और दाहिनी ओर की खिड़की सोने जाने के पूर्व मेरे पति ने बन्द कर दी थी। मेरे पति उस समय सो चुके थे। मैं पलंग पर सीधे लेटी थी। किसी के पलंग पर बैठने के अहसास के साथ ही चारपाई हिलने की अनुभूति हुई और बिस्तर पर लगी कैनोपी के मेरी ओर के दो कंगूरे हिलने लगे। कुछ क्षणों के बाद सब कुछ शान्त हो गया। मुझे कुछ अजीब सा लगा पर मैंने एक बार पुनः जेन को धन्यवाद दिया। इसके बाद न जाने क्यों कक्ष में एक रिक्तता की अनुभूति हुई। मुझे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे कोई आत्मीय बिछुड़ गया है। मैं इस अनुभूति को मनोवैज्ञानिक भ्रम नहीं मान सकती, मुझे ऐसा लगता है जैसे जेन की आत्मा मेरे समीप आकर बैठी थी और अपने स्नेह की सुगन्धि छोड़कर चली गई।

जेन के विषय में

एक दिन इला, जो कि स्विटज़रलैन्ड की एक प्रसिद्ध लेखिका एवं अनुवादक हैं, ने जेन के विषय में बताया -

"मैंने कहीं पढ़ा है कि लेडिग की मृत्यु के पश्चात जेन बहुत अकेली हो गई थीं। जो मैंन्शन लेडिग के समय उनके साहित्यकार मित्रों के कहकहों से गूँजा करता था, अब वहाँ कोई चिड़िया भी पर मारने नहीं आती थी। जेन अकेली इतने बड़े मैंन्शन में घूमा करती थीं, केवल उनकी नौकरानियाँ काम करने आतीं और काम समाप्त करके चली जातीं। एक दिन जेन रात में अकेले ड्राइंगरूम में बैठी थीं। वह बहुत अकेलापन महसूस कर रही थीं और उन्हें कुछ अजीब सी अनुभूति हो रही थी। अचानक उन्हें ड्राइंगरूम के बाहर प्रकाश दिखाई दिया। वह उठकर दरवाज़े के पास आईं। जेन ने बाहर झाँककर देखा तो वह चकित रह गईं। - डाइनिंग रूम में प्रकाश था और वहाँ उनके पति लेडिग अन्य लेखकों के साथ बैठे हँसी-मज़ाक कर रहे थे। हालांकि जब उन्होंने वहाँ जाकर देखा तो वहाँ कोई नहीं था परन्तु इससे जेन भयभीत नहीं हुईं बल्कि इस घटना ने जेन का मनोबल बढ़ाया था। उन्हें यह देखकर बहुत संतोष हुआ कि वह अकेली नहीं हैं और उनके पति अभी भी उनकी देख-रेख करते हैं।"

सोफ़ी का साक्षात्कार

सोफ़ी शतो द लाविनी की मैंनेजर व केयर टेकर हैं। रेज़ीडेन्सी में रुकने की अवधि समाप्त होने वाली थी अतः मैंने उनसे साक्षात्कार का समय लिया। ११ बजे प्रातः सोफ़ी आकर लॉन में बैठ गईं। कुछ देर उन्होंने हमारे परिवार के विषय में जानकारी ली और फिर विषय पर आते हुए प्रश्न किया-

"आप मुझसे क्या जानना चाहती हैं ?"

मैंने उत्तर दिया-

"मुझे लेडिग व जेन के विषय में जानने की बहुत इच्छा है। फ़्रेंच भाषा का ज्ञान न होने से हम इतना साहित्य होते हुए भी उनके विषय में अधिक न जान सके। कुछ लोग कहते हैं कि यहाँ घोस्ट रहते हैं क्या यह सच है?"

सोफ़ी ने बताया -

"लेडिग का व्यक्तित्व बहुत चमत्कारी था। लोग उन्हें बहुत पसन्द करते थे। जब वह जीवित थे तो वह बराबर लोगों को अपने यहाँ आमन्त्रित करते रहते थे। उनके दो विवाह हुए थे। जेन उनकी दूसरी पात्नी थीं। जेन कुछ रिज़र्व स्वभाव की थीं इस कारण कुछ लोग उन्हें घमण्डी कहते थे परन्तु लाविनी के आस-पास के लोग जेन को बहुत पसन्द करते थे। वह बहुत सहृदय स्त्री थीं। उनके अपनी कोई सन्तान नहीं थी। लोग बताते हैं कि क्रिस्मस के अवसर पर वह आस-पड़ोस के बच्चों के लिये पार्टी का आयोजन करती थीं। वह सान्ताक्लॉज़ बनती थीं और बच्चों को गिफ़्ट देती थीं। एक बार मेरी पड़ोस के शतो के निवासी से भेंट हुई थी। उसने जेन की प्रशंसा करते हुए कहा - जेन बहुत सहृदय और अच्छी महिला थीं। नये वर्ष पर वह पार्टी रखती थीं तो हम सबको शोफ़र ड्रिवेन कार भेजकर बुलवाती थीं।"

मेरे पति ने पूछा- "क्या आप लेडिग व जेन से व्यक्तिगत रूप से मिली हैं?"

सोफ़ी ने गहरी श्वांस लेकर उत्तर दिया-

"मुझे दुःख है कि मैं उन लोगों से नहीं मिल पाई। लाविनी के लोगों से जब उन लोगों के विषय में बात होती है तो लोग जेन के बारे में अच्छी बातें ही कहते हैं। मुझे जेन के प्रति बहुत सहानुभूति है। जीवन के अन्तिम दिनों में जेन बिल्कुल अकेली थीं- केवल वह और उनके घर में काम करने वाली स्त्री। जब जेन की मृत्यु हो गई तो वह स्त्री इस बारे में सबको सूचित करके, उनकी बॉडी यहाँ छोड़कर यहाँ से चली गई। बाद में डॉक्टर ने आकर उन्हें मृत घोषित किया और उनका संस्कार किया गया। जेन के विषय में जानकर मेरा हृदय उनके प्रति करुणार्द्र और स्नेहिल हो उठा। मुझे शातो में अभी भी जेन की एनर्जी की अनुभूति होती है। मुझे ऐसा लगता है कि जेन की आत्मा यहाँ पर आने वाले रायटर्स का स्वागत करती है। वह दिल से शतो को रायटर्स के लिये प्रदान करना चाहती थीं।"

"क्या आपको कभी किसी अन्य प्रकार की अनुभूति यहाँ पर हुई?" -मैंने संकुचित स्वर में सोफ़ी से पूछा तो उन्होंने बिना हिचक के उत्तर दिया-

"पहले मैं पैरिस में रहती थी। मैंने शतो के मैनेजर के पद के लिये इन्टरव्यू दिया था परन्तु मेरे बजाय किसी अन्य महिला का इस पद के लिये चुनाव हो गया था। वह महिला यहाँ पर बने घर में रहने के लिये आ भी गई थी। एक दिन रात को ३ बजे वह न जाने कैसे शतो में पहुँच गई और गार्ड ने उसे चीखते हुए सुना। अगले ही दिन वह जॉब छोड़कर चली गई। इसके बाद कमेटी मेम्बर्स जिसको भी इस जॉब के लिय बुलाते वह कन्नी काट जाता। इसी समय एक कमेटी मेम्बर को मेरी याद आई। मैं उस समय कोई जॉब नहीं कर रही थी और भाग्यवश लूज़ान में अपनी ममी के पास आई हुई थी। माँ के पास फ़ोन आया तो मैंने इस जॉब के लिये हाँ कर दी। मुझे यहाँ आये हुए १२ वर्ष हो गये हैं। शुरू में जब मैं शातो में आई तो मुझे अन्दर प्रवेश करने पर भिन्न प्रकार की अनुभूति होती थी। मुझे ऐसा लगता था जैसे मेरे आस-पास कई लोग हैं। हवा में भारीपन का अहसास होता था। शतो में प्रवेश करने पर मुझे ऐसा लगता जैसे यहाँ मेरे अतिरिक्त और लोग भी हैं। मैं मन ही मन बुदबुदाकर कहती-

"मैं आपकी इज़्ज़त करती हूँ, आप भी मेरी रक्षा कीजिये। मैं यहाँ आपका कोई नुकसान करने नहीं आई हूँ।" जब मैं ऐसे कहती तो मुझे इसके बाद ऐसा लगता जैसे हवा में हल्कापन आ गया है। यह अनुभूति गर्मियों में कम होती है परन्तु सर्दी में अधिक होती है। मुझे ऐसा लगता है कि जब गर्मी में रायटर्स यहाँ रहते हैं तो जेन की ऊर्जा शक्ति अधिक तीव्र बनी रहती है और उस समय उस प्रकार की विचित्र अनुभूति नहीं होती है, परन्तु सर्दियों जब शतो बन्द रहता है, जेन की इनर्जी कम हो जाती है और अन्य शक्तियाँ अधिक शक्तिशाली हो जाती हैं।"

सोफ़ी ने शतो के विषय में बताया कि-

"यह शतो १८ वीं शताब्दी में बनाया गया था। लेडिग के खरीदने के पहले यह अनेक घटनाओं से गुज़रा है। न जाने कितनी ऐतिहासिक घटनायें इसमें हुई हैं। लोग कहते थे कि इसमें अनेकों आत्मायें रहती हैं। मैं यह कह सकती हूँ कि मैंने किसी आत्मा को देखा नहीं है पर मैं स्वयं को जेन के अत्यन्त निकट महसूस करती हूँ। हो सकता है कि मैं जेन के कार्य को कर रही हूँ इस कारण ऐसा अनुभव करती हूँ। एक बात ज़रूर है कि गर्मी की अपेक्षा जाड़ों में शतो को खोलने में मुझे भिन्न प्रकार की अनुभूति होती है और जब मैं कहती हूँ- "आय रिस्पेक्ट यू एंड यू रिस्पेक्ट मी" तो मुझे अपने आस -पास लोगों के होने की अनुभूति कम हो जाती है। यह सच है कि इन १२ वर्षों में जाड़ों में इस विचित्र अनुभूति का होना पहले की अपेक्षा कम हो गया है।"

"क्या किसी अन्य व्यक्ति को भी यहाँ कोई विचित्र अनुभव हुआ था?" - मैंने प्रश्न किया।

सोफ़ी ने याद करते हुए एक घटना का ज़िक्र किया-

"एक बार पनामा के लेखक जुआन डेविड मौर्गन शतो में रुककर पनामा की ऐतिहासिक, और राजनैतिक स्थिति पर किताब लिख रहे थे। उस समय लेडिग की मृत्यु हो चुकी थी। एक दिन रात को उनकी नींद खुल गई तो उन्होंने देखा कि उनके कम्प्यूटर की लाइट जल रही है और लेडिग की छाया वहाँ पर है जो उनके आर्टिकल को चेक कर रही है। लेडिग की आदत थी कि वह लोगों के आर्टिकल्स को स्वयं चेक किया करते थे।"
मेरी उत्सुकता अभी और जानने की थी परन्तु सोफ़ी को लूज़ान में अपनी पिक्चर के कुछ दृश्यों के फ़िल्मांकन के लिये विलम्ब हो रहा था अतः वह घड़ी देखते हुए क्षमा माँग कर चली गईं। मुझे जितनी जानकारी मिल गई थी मैं उससे प्रसन्न थी कि चलते-चलते कुछ तो नयी जानकारी मिल गई- कुछ नहीं से तो कुछ ही सही।

मौरेल के अद्भुत संस्मरण

शाम के सात बजे हैं। हम सभी शातो के रेज़ीडेन्ट्स आकर ड्राइंग रूम में बैठ गये हैं। फ़्रांसिन नामक स्त्री जो आज किचेन का कार्य संभाल रही है, एक ट्रे में एक बोतल व्हाईट वाइन, एक एप्पल जूस और एक प्लेट में चिप्स लेकर आती है और सेन्टर टेबिल पर सज़ा कर चली जाती है। आज रविवार है अतः मैंनेजर सोफ़ी वीक एन्ड के लिये बाहर गई हैं। बाहर वर्षा होने लगी है अतः ठण्ड बढ़ गई है। दरवाज़े के बाहर खड़े विशाल मेपल ट्री, पाइन ट्री और ओक ट्री स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। तेज़ हवा चलने से वृक्षों के पत्तों की सनसनाहट एवं खड़खड़ाहट वातावरण को रोमांचित कर रही है। ऐसे में शातो द लाविनी के शान्त वातावरण में एकाकीपन की अनुभूति होती है हालांकि वहाँ पर हम छः लोग उपस्थित हैं। चारों ओर प्राचीन फ़र्नीचर, लेडिग व जेन की विभिन्न पोज़ों में फ़ोटो और व्यक्तिगत सामग्री देखकर शरीर में रोमांच हो आता है। मैंने देखा कि यह अनुभूति लगभग सभी को हो रही थी क्योंकि सभी की मुखमुद्रा कुछ अव्यवस्थित सी थी। इतने में बल्गेरिया से आये पेटर बोल पड़े- "क्या किसी ने घोस्ट देखा है?" बात हँसी में टाल दी जाती है पर ऐसा लगता है कि सबके हृदय सशंकित हैं। बातों-बातों में स्कॉटलैन्ड से आई मौरेल ने बताया कि मैंने तो घोस्ट नहीं देखा पर मेरी बेटी ने कुछ अनोखा अवश्य सुना है। मौरेल स्कॉटलैन्ड की एक सुप्रसिद्ध लेखक व अनुवादक हैं। मेरे आग्रह करने पर मौरेल ने अपनी बेटी की घटना हमें सुनाई। उन्होंने बताया कि-

"मैं अपने परिवार के साथ एडिनबरा, स्कॉटलैन्ड में स्कॉटब्रिज में रहती थी। एक दिन रात को मेरी चौदह वर्षीया बेटी उठी तो उसने सुना कि कोई उससे कह रहा है- "गेट अवे। हाइड।" उसने देखा कुछ नहीं केवल सुना ही था और उस समय वह बहुत डर गई थी।"

मौरेल ने अपनी मम्मी के साथ घटित एक घटना और सुनाई। उन्होंने बताया कि-

"मेरे पिता की मृत्यु के कुछ माह के बाद की घटना है। एक दिन मेरी मम्मी इज़ाबेल स्मिथ सड़क पर जा रही थीं कि उन्होंने देखा कि उनके पति [मेरे पिता] सड़क के दूसरी ओर खड़े हैं। मम्मी चकित होकर उस ओर चल दीं। उन्होंने अपने पति को "विलियम" कहकर आवाज़ भी लगाई पर वह इनको देखकर गायब हो गये।"
मौरेल ने अपनी मम्मी के द्वारा बताया गया अपनी दादी का भी एक अनुभव सुनाया।

"मेरे दादा जी की मृत्यु के पश्चात दादी बहुत बीमार हो गई थीं। यहाँ तक कि उनके बचने की कोई आशा नहीं थी। एक दिन उन्होंने स्वप्न देखा जिसमे उन्हें ऐसी अनुभूति हुई कि वह एक सुरंग के बाहर निकल रही हैं। उन्होंने देखा कि वहाँ पर तेज़ प्रकाश है। वहाँ दादा जी खड़े हैं और कई एन्जिल भी हैं। थोड़ी देर में सब आँखों के सामने से गायब हो गया और इस स्वप्न के बाद कुछ दिनों में वह बिल्कुल ठीक हो गईं।"


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