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| 07.28.2007 |
| याद भी आते क्यूँ हो नीरज गोस्वामी |
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नहीं मिलना तो भला याद भी आते क्यूँ हो
इस कमी का मुझे अहसास दिलाते क्यूँ हो डर तुम्हें इतना भी क्या है कहो ज़माने का रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाते क्यूँ हो दिल में चाहत है तो काँटों पे चला आएगा आप पलकों को गलीचे सा बिछाते क्यूँ हो हम पर इतने किये उपकार सदा ये माना हम को हर बार मगर आप गिनाते क्यूँ हो जाने किस वक्त तुम्हें इनकी जरूरत होगी आप बेवक्त ही अश्कों को गिराते क्यूँ हो यारी पिंजरे से ही कर ली है जब परिंदे ने आसमां उसको खुला आप दिखाते क्यूँ हो जिंदगी फूस का इक ढेर है इसमें आकर आग तुम इश्क की सरकार लगाते क्यूँ हो मुझको मालूम है दुश्मन नहीं हो दोस्त मेरे मुझसे खंजर को बिना बात छुपाते क्यूँ हो इश्क मरता नहीं नीरज ये हकीक़त जानो किसी मीरा को ज़हर आप पिलाते क्यूँ हो |
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