| अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली |
![]() |
मुख्य पृष्ठ |
| 07.15.2007 |
|
झूठ को सच बनाइए
साहब नीरज गोस्वामी |
|
झूठ को सच बनाइए
साहब
छोड़िए साथ इस
शराफ़त का
फल है देता तो खाद
पानी दो
घर ये अपना नहीं
चलो माना
ताज पहनोगे सोचते
हो कहाँ
वो ना दिल में तो
है कहाँ नीरज |
| अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें
|