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07.15.2007
 
बस  फकत अटकलें लगाते हैं
नीरज गोस्वामी

बस  फकत अटकलें लगाते हैं
हम कहाँ तुमको समझ पाते हैं
 

आम की  डाल सा है दिल मेरा
आप  कोयल से गीत गाते हैं
 

तुम इशारा कभी करो तो सही
छोड़  हम  सब सहारे आते हैं
 

राह मिलती कहाँ किसी दिल की
बस  दिेवाने   ही  ढूंढ पाते हैं

हमसे  जो रूबरू नहीं  मिलते
वो  ही सपनों में आते जाते हैं
 

दूर रह  कर भी पास  लगते हैं
जिनसे भी दिल के रिश्ते नाते हैं
 

ज़िंदगी  बेमज़ा  नहीं  रहती
प्यार का छौंक जब लगाते हैं
 

तुमसा  उसके नहीं खज़ाने में
रब तो अपना है माँग लाते हैं
 

दिल की सूनी हवेली में नीरज
खुद  के  साये  मुझे डराते हैं
 


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