नीरज गोस्वामी


दीवान

आप जब टकटकी लगाते हैं
आए मुश्किल
इंसानियत के वाक़ये दुशवार...
कह दिया वो साफ़ जो ....
कुछ सदा में रही कसर शायद
कौन करता याद
ख़ार राहों के फूलों में ..
गुफ़्तगू इससे भी करा कीजे
जहाँ उम्मीद हो ना मरहम की
जान उन बातों का मतलब
जैसा बोएँ वैसा प्यारे पाएँगे
झूट जब बोला तो ताली हो गई
झूठ को  सच बनाइए साहब

दिल का मेरे
दूध पी के भी नाग डसते हैं
फूल उनके हाथ में जँचते नहीं
फैसले की घड़ी जो आयी हो
बस फकत अटकलें लगाते है
मान लूँ मैं ये करिश्मा....
मैं तन्हा हूँ ये दरिया में
याद आये तो
याद की बरसातों में
याद भी आते क्यूँ हो
लोग हसरत से हाथ मलते हैं
वक्त उड़ता सा  चला जाता है
वो ना महलों की ऊँची शान..
सीधी बातें सच्ची बातें
हसरतों की इमलियाँ