नवल किशोर कुमार

कविता

अब भी मेरे हो तुम
क़िस्मत
कोशिश
खंडहर हो चुके अपने ...
ख़्वाहिशें
गरीबों का नया साल
चुनौती
चूहे
जीवन का यथार्थ
जीवन मेरा सजीव है प्रिये
नसों में जब बहती है
नागफनी
बारिश
बीती रात के सपने
बैरी हवा
मानव
मैं लेखक हूँ
मोक्ष का रहस्य
रोटी, कपड़ा और मकान
वक्त को रोक लो तुम
शून्यता के राह पर
सुनहरी धूप
सूखे पत्ते
स्वर्ग की तलाश
हे धर्मराज, मेरी गुहार सुनो

आलेख
ब्राह्मणवादी व्यवस्था के ख़िलाफ़ आंदोलन है छठ महापर्व
समाचारपत्रों से विलुप्त होता साहित्य
दीवान
अब नहीं देखता ख़्वाब ....
ये कौन दे रहा है यूँ दस्तक़