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ISSN 2292-9754

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07.19.2014


यूँ जब-जब शबनम रोती है

२२ २२ २२ २२
यूँ जब-जब शबनम रोती है
यह देख के शब नम होती है

दुनिया परवाह करेगी क्यों
ज़ख़्मों पर वाह जो होती है

जगमग देखी दुनिया मेरी
जग मग में ख़्वाब डुबोती है

प्रिय तम में छोड़ गया उसको
प्रियतम की ख़ातिर रोती है

मूसा फिर राह दिखाते जब
फिर राहे-मुसाफ़िर होती है


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