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02.24.2007

 
परिचय  
 
नाम : मंगला  रामचंद्रन
लेखन : हिन्दी में लिखने वाली तमिल भाषी परिवार की सदस्या। लेखन कर्म करते हुए तीन दशक से भी अधिक समय हो गया है। लगभग अढ़ाई सौ कहानियाँ दो सौ लेख तथा हास्य व्यंग्य व कुछ लघु कथाएँ देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। अब तक छह कहानी संग्रह तथा एक व्यंजन की पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है।
संप्रति :  
प्रकाशन :

कहानी संग्रह :

आधुनिक अहिल्या, प्रश्नों का बरगद, तीसरा पड़ाव, तुमको कुछ नहीं आता, काऊन्ट डाउन, कदंबम

सम्पादनः एक कहानी संग्रह 'जमीन अपनी अपनी' का संयुक्त रूप से संपादन।
उपलब्धियाँ : कुछ कहानियों का  उर्दू  तमिल तथा मराठी में भाषान्तर हुआ है।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की छात्रा द्वारा लघु शोध प्रबंध।
दिल्ली के प्रकाशन द्वारा कल्पना चावला की स्मृति में
‘नारी चेतना के स्वर’ में देश भर की तीन सौ महिला रचनाकारों की कविताओं में रचना शामिल।
सम्मान व पुरस्कार :
  1. प्रथम कहानी संग्रह आधुनिक अहिल्या     सन १९९२ में  राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा।
  2. सन १९९२ में ही आकाशवाणी भोपाल का प्रथम ‘लक्ष्मी बाला सम्मान'।
  3. सन १९९८में इंदौर लेखिका संघ व्दारा ‘अंतर्रार्ष्टीय महिला दिवस’ पर सम्मान।
  4. सन २००० में हिन्दी दिवस पर रोटरी क्लब व्दारा सम्मान।
  5. सन २००१ में उज्जैन में भारतीय दलित साहित्य अकादमी व्दारा ‘महिला सजन के विविध आयाम’ के अंतर्गत प्रेषित लेख के लिए ‘राष्ट्रीय आम्बेडकर साहित्य सम्मान’ से विभूषित।
  6. सन २००२ में कहानी संग्रह ‘जमीन अपनी अपनी’ के संपादन के लिए संयुक्त रूप से गाजियाबाद से ‘निर्मला देवी स्मृति पुरस्कार’।
  7. 'कथाबिम्ब’ साहित्य पत्रिका  मे कहानी  पुरस्कृत  हुई।
सम्पर्क Mmangla.ramachandran@gmail.com