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04.29.2012

तिलचट्टा

तिलचट्टा
अपनी नाक पर उगी
तलवार सी मूँछों को लेकर
किसी सेनापति से बहुत खुश था
और नाली की जाली में
अलमस्त घूमता फिरता
या बिलबिलाता था
पर एक दिन उसे
न जाने क्या सूझी
शायद उसे अपने तिलचट्टेपन के कारण
यह बात सूझी होगी
और वह ब्रह्मांड नापने चल दिया
अपने कमज़ोर पैरों और
तलवार सी मूँछों के साथ
वह बहुत ख़ुश था नाली के आगे
चिकने लम्बे फर्श को देखकर
वह उसपे रपटने और दौड़ने लगा
अचानक चिकने फर्श के मालिक ने देखा
इस साफ सुथरे फर्श पर
तिलचट्टा
झट उसने ‘हिट मी’ के बटन को दबाया
और कुछ गैस निकल कर
तिलचट्टे को दर का दर ख़त्म कर गयी
जिस तरह कुछ लाख यहूदियों को
गैस चैम्बर मे ख़त्म कर दिया गया था
कुछ सिरफिरे नाज़ियों के द्वारा
तिलचट्टा
अब फिर नाली में था
अपनी मूँछों के साथ
पर अब वह मर चुका था।


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