उम्र के इस पड़ाव पर आकर मैं तुम्हें हर पल अपने पास रखना चाहता हूँ तुम कोई मुद्रा तो हो नहीं जिसका उपभोक्तावादी संस्कृति में अवमूल्यन होता चला जाएगा ।