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ISSN 2292-9754

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06.23.2017


दरया तलाश कर ना समन्दर तलाश कर

दरया तलाश कर न समन्दर तलाश कर
जो भी सुकूँ है अपने ही घर पर तलाश कर

क्यूँ ढूँढ़ताहै जा के कलीसा में तू उसे
मालिक को दोस्त अपने ही अंदर तलाश कर

जीने की राह तुझको जो चलकर दिखा सके
ऐसा फ़कीर या कोई रहबर तलाश कर

बैठा पहाड़ पे कहीं धूनी रमाई के
तकदीर जो बदल दे वो शंकर तलाश कर

ऐ दोस्त ज़िन्दगी ये कभी रुकती नहीं
सहरा की ख़ाक छान ली अम्बर तलाश कर

कमज़ोर हो के बैठना अच्छा नहीं यहाँ
उठ होंसले के साथ जा अवसर तलाश कर

आईना ज़िन्दगी को बनाना है गर तुझे
दरया खंगाल इल्म के गौहर तलाश कर

पल भर में नफ़रतें जो मिटा दे ज़हान से
वो फूल से बना हुआ खंजर तलाश कर

सबके दिलों में प्यार का दीपक जला दे जो
दुनियां में ऐसा कोई कलंदर तलाश कर

जिनको गुरूर था कभी अपनी बुलन्दी पर
इतिहास जानना हो तो खंडहर तलाश कर

बेवजहा सर को फोड़ना अच्छा नहीं मुकेश
सुन ले तेरी जो बात वो पत्थर तलाश कर


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