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| 09.09.2007 |
| फिर आयो मधुमास मुकुन्द ध्यानी |
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विगत शीत की प्रखर वेदना, अब रवि किरणों की सुखद बहार तृण - तृण रची हरित प्रभा, धरती पर नव जीवन संचार प्रस्फुटित तरुवर कोमल किसलय, कली - कली सकुमार पुलकित वसुधा अंग अंग, बह चली बसंती मृदु बयार प्रकटयो प्रकृति हुलास सखी आयो री मधुमास .. .. नव पल्लव कुसुमित सकल वन उपवन सुसज्जित वसुधा फूली सरसों पीत बसन तन मंथर मंथर गति सुरभित चली मलय पवन मदिर नयन, अस्थिर सा तन बौराया सा चंचल मन तन मन आयो उल्लास सखी फिर आयो मधुमास .. .. हरितरु पादप पुष्पित फल पूरित झुकी डालियाँ खेत भरे भरपूर धान से, पवन झकोरे हिली बालियाँ बिखरे रंग विभिन्न वसुधा पर, पवन स्पर्श तन चटकी कलियाँ भ्रमर गुंजित भटके वन उपवन, कली-कली रस लोलुप छलिया फूले अर्क जवास सखी आयो फिर मधुमास .. .. फुदक फुदक खग युगल, प्रणयरत डार डार रंग बिरंगी पंतग फिरें , हुलिस हुलिस निज पंख पसार कल कल गुन गुन ध्वनि, झंकृति ज्यों वीणा की झंकार उन्मादित तन कोई छेड़ गया सखी नम वीणा के तार उठी पीर हृदय के आस पास सखी री फिर आयो मधुमास .. .. प्रीति पगी नव यौवन में, पलकों में सपने बन्द किये तन में त्रास, हृदय में आस, अधरों में प्यास अमन्द लिये न मुख में बैन, न चित्त में चैन, भ्रमित मानस में द्वन्द्व लिये चंचल हिरण सी इत-उत डोल, निज तन में कस्तूरी गंध लिये सखी कैसा यह अहसास फिर आयो री मधुमास .. .. नगर नगर अरु डगर डगर, चलि हुरियारों की टोलियाँ रंगों की ऋतु रंग रची, मद में झूमी हम जोलियाँ प्रेम रंग भर पिचकारी में, रंग भीगी चुनर चोलियाँ इक नया रंग और नई उमंग, भर जाती जीवन में होलियाँ नया संकल्प, नया विश्वास सखी री, फिर आयो मधुमास।। |
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