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09.09.2007
 
हम आज़ाद हैं आज
मुकुन्द ध्यानी

बुलन्द हैं इरादे, हम आज़ाद हैं आज।
जो चाहें करेंगे, अब अपना है राज।।

क्या हुआ जो कुछ पेट भूखे भी हैं
कुछ खेत खलिहान सूखे भी हैं
कुछ अनपढ़ सही कुछ बीमार हैं
गरीबी और तंगी से लाचार हैं
सौ करोड़ लोगों को क्या क्या करेंगे?
मरने दो मरते हैं मरते रहेंगे

अपनी सौ करोड़ आबादी पे हम को है नाज।
जो चाहें करेंगे, अब अपना है राज।।

सरकारी नौकर हैं क्यों करना है काम
योग्यता बिन मोल बिकी आरक्षण के नाम
सरकार के नाम हमारा है पैगाम
बाज़ार में बढ़ेंगे जो चीजों के दाम
हड़तालें करेंगे और चक्का जाम
जनता जनार्दन तो रोती रहेगी
हमारी मनमानी भी चलती रहेगी

ठप्प कर देंगे हम देश के काम काज।
जो चाहें करेंगे, अब अपना है राज।।

स्कूल और कालिजों में नित नये दंगे
युवकों को गुमराह करते लफंगे
छात्र शक्ति हैं हम मानो हमारी माँगे
उचित हो अनुचित हम करके रहेंगे
लगा देंगे आग हम सब फूँक देंगे
लिहाज किसी की हम कभी न करेंगे

उद्दण्डता का सड़कों पे है नंगा नाच।
जो चाहें करेंगे, अब अपना है राज।।

बाँटेंगे नोट और माँगेंगे वोट
नेता हैं हम है कहाँ हम में खोट?
मन्त्री बनेंगे लेके गुंडों की ओट
सौ घोटाले करेंगे फिर डंके की चोट
लेते हैं रिश्वत और लेते रहेंगे
सब कोई लेते हैं, हम क्यों न लेंगे

इसमें काहे की शर्म और काहे की लाज।
जो चाहें करेंगे, अब अपना है राज।।

न कोई भेद-भाव न कोई अन्तर
धर्म निर्पेक्ष का जपते हैं मन्तर
ढाह देंगे मस्जिद और मिटा देंगे मन्दिर
गुनाह किसी का और किसी का कटे सिर
यों लड़ने वाले तो लड़ते रहेंगे

सलामत रहे कुर्सी और तख़्तो ताज।
जो चाहें करेंगे, अब अपना है राज।।


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