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ISSN 2292-9754

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12.05.2015


हर पल की तुम बात न पूछो

हर पल की तुम बात न पूछो
कैसे गुज़री रात न पूछो

बाहर सब-कुछ सूखा-सूखा
अन्दर की बरसात न पूछो

जिसको सुन के पछताओगे
तुम मुझसे वो बात न पूछो

साहिल पे ही डूब गए वो
कैसे थे हालात न पूछो

दुनिया से तो जीत रहा हूँ
ख़ुद से ख़ुद की मात न पूछो

मिलता है ‘इरशाद’ सभी से
उससे उसकी जात न पूछो


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