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ISSN 2292-9754

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04.01.2015


महीयसी महादेवी

छायावाद की बृहद्‍त्रयी से
कुछ अलग पहचान बनातीं।
महीयसी महादेवी कवयित्री
’रहस्यवादी’ कहलातीं।

’नीहार’, ’रश्मि’, ’नीरजा’
और ’सांध्यगीत’ लिखा
अंधेरे से जूझतीं
आप निष्कंप ’दीपशिखा’।

’अतीत के चलचित्र’, 'शृंखला की कड़ियाँ’
और ’स्मृति की रेखाएँ’
’पथ के साथी’ सदृश
हैं आपकी गद्य रचनाएँ।

कहीं नश्वरता, कहीं विरह,
कहीं वेदना, कहीं निराशा,
कहीं आत्मीयता, कहीं करुणा,
कहीं जगमगाती-सी आशा।

’तमसो मा ज्योतिर्गमय’ तक आपकी
काव्य-यात्रा पग बढ़ाती,
मनुष्यत्व से दिव्यत्व तक की
राह है दर्शाती।


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