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ISSN 2292-9754

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04.01.2015


कालजयी जयशंकर प्रसाद

आधुनिक काल के सुप्रतिष्ठित
छायावादी कवि, संस्कृतिचेता और सुविचारक
कुशल नाटककार-निबन्धकार
एवं इतिहास के पुनरुद्धारक।

’झरना’, ’आँसू’, ’लहर’, ’प्रेमपथिक’, ’करूणालय’
’महाराणा का महत्तव’, ’कामायनी’ और ’चित्राधार’
हिन्दी साहित्य समृद्ध हुआ
पाकर आपसे काव्योपहार।

’ध्रुवस्वामिनी’, ’अजातशत्रु’, ’चंद्रगुप्त’, ’स्कंदगुप्त’ सरीखी
नाट्य-रचनाएँ दीं बेजोड़
’कंकाल’, ’तितली’, ’इरावती’
उपन्यास रचे अनमोल।

’आँधी’, ’आकाशदीप’, ’छाया’,
’प्रतिध्वनि’ और ’इन्द्रजाल’
कहानी-लेखन का भी
आपका दायरा है विशाल।

आजीवन-अनवरत लेखन आपकी
प्रतिभा का है प्रमाण
भारतीयता, मानवता, विश्व-बंधुत्व एवं सामरस्य का
है तव साहित्य में मान।

हिन्दी साहित्य-जगत में आप हैं
सूक्ष्म सौन्दर्य के चितेरे,
पावन साहित्य-वीणा आपकी
सत्यं-शिवं-सुन्दरं के संवादी स्वर छेड़े।


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