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ISSN 2292-9754

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04.01.2015


अमर कथा-शिल्पी मुंशी प्रेमचन्द

कोरे मनोरंजन से मुक्त कर साहित्य को
सामाजिक विशेषताओं-विकृतियों के अंकन से जोड़,
क़लम के धनी, कथा-साहित्य-सम्राट
विश्व-साहित्य-संसार में ’प्रेमचन्द’ हैं बेजोड़।

स्वतन्त्रता-संग्राम, औद्योगीकरण, अनमेल विवाह
और कृषक संस्कृति के दयनीय जीवन का साक्षात्कार,
प्रेमचन्द-साहित्य के फलक पर है चित्रित,
भारतीय जन-जीवन का बहुरंगी संसार।

कहीं गाँधीवाद तो कहीं मार्क्सवाद के स्वर,
कहीं हैं आदर्श तो कहीं यथार्थ की डगर।

’मानसरोवर’ में संकलित उत्कृष्ट
कहानियों का अमूल्य योगदान,
’माधुरी’, ’मर्यादा’, ’जागरण’ और ’हंस’ को
दिया सम्पादन का वरदान।

उपन्यासों ’निर्मला’, ’रंगभूमि’, ’कायाकल्प’
’गबन’, ’कर्मभूमि’ और ’सेवासदन’,
’मंगलसूत्र’ और ’गोदान’ के रचयिता
आपको कोटि-कोटि नमन।


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