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ISSN 2292-9754

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04.01.2015


आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

हे ’सरस्वती’ के सम्पादक
हिन्दी-सेवा को संकल्पित,
हिन्दी के कर्मठ सेनानी,
तुमसे भाषा हुई सुसंस्कृत।

दी खड़ी बोली को प्रौढ़ता
और निश्चित सुघड़ आधार
दी व्यवस्था और मार्दव
तथा उत्तरोत्तर निखार।

खड़ी बोली हिन्दी के
विकास-रथ के सारथी,
जनता की रूचियों और
आकाँक्षाओं के पारखी।

शृंगारिकता से राष्ट्रीयता का,
जड़ता से गतिशीलता का,
साहित्य को दे नव दिशा-निर्देश;
भाषिक शुद्धि और एकरूप वर्तनी का
कर प्रबल समर्थन और श्रीगणेश।

रख नखशिख ईमानदारी
अदम्य वीर-भाव और निश्छलता
आत्म-विस्मृत पुजारी-सम
सर्वस्व हिन्दी-मंदिर में चढ़ा दिया।

आज जिसे हम गर्व से कहते
भारत माँ के भाल की बिन्दी
इनके ही श्रम-बिंदुओं से सिंचकर
फली-फूली यह आज की हिन्दी।


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