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01.26.2012

साहित्यकार
मीना पांडे

साहित्यकार प्रेम नहीं करते
प्रेम में घायल होते हैं
झोली भर अश्रु
सैकड़ों झंझावत
"औ" पीड़ाओं का इतिहास
होती है एक रचना।
साहित्यकार श्रायित है
दर्द से उद्विग्न
छलनी अंर्तमन को।
साहित्यकार अस्पृश्य है
विचारों की गंध
विद्रोहों की छुअन
संक्रमित कर देती है
उनके कल, आज "औ" कल को।

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