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| 07.03.2007 |
| श्रद्धांजलि मीना जैन |
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काव्य जगत की दीप शिखा तुमको मेरा शत-शत प्रणाम साहित्य संस्कृति गौरवान्वित अतुलनीय अभिव्यक्ति अभिराम धन्य-धन्य वह देश जहाँ तुम्हारी मधुर कविता गूँजी धन्य प्रयाग की कर्म-भूमि जहाँ संग्रहीत कृतियों की पूँजी दृगजल सजल गीति-काव्य छायावाद युग की सर्वोत्तम निधियाँ करुणा कलश छलक पड़ता गुरुतर गहन अनुभूतियाँ आज स्वर हैं मौन सारे नयनों में छाई नीर भरी बदली श्रद्धावनत नमन तुम्हें समर्पित भाव-भीनी श्रद्धांजलि। |
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