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03.12.2008
 
रात भर
मीना जैन

रात भर
मेरे आँगन
हरसिंगार झरता रहा
रात भर
पू्र्णिमा का चाँद
लहरों से गुहार करता रहा
रात भर
सागर का ज्वार
तट पर आकर गरजता रहा
रात भर
नेह का बादल
प्यासी पृथ्वी पर बरसता रहा
रात भर
विरही मन
प्रिय के लिये तरसता रहा
रात भर
हवाओं में
एक गीत का स्वर उभरता रहा ।


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