अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
10.08.2007
 
पर्वतारोहण
मीना जैन

 

मैंने  पर्वतारोहियों  को

पर्वतारोहण पर जाते देखा है

कभी गिरते, कभी थकते

कभी सतर्क हो सँभलते देखा है

 

हर कोई किसी विशेष

अभियान पर नहीं निकलता

बड़ी चुनौतियों को स्वीकारना

सबके  बस का नहीं होता

 

जो चल पड़ते दुर्गम पथ पर

अद्भुत होती उनकी साहस सीमा

समय, संयम, अनुशासन

बनाये रखते धैर्य की गरिमा

 

घर का सुख-वैभव छोड़कर

कोमल भावनाओं को भूलकर

चलते शिखर को लक्ष्य मानकर

न रुकते पथ पर कहीं हार कर

 

प्रण  ठानते, पुरुषार्थ करते

पाँव शिखर तक स्वयं पहुँचते

दूसरों के लिये उदाहरण बनते

सब सर ऊँचा कर उन्हें तकते ।



अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें