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04.05.2008
 
पहाड़ पर
मीना जैन


भूल नहीं पाती
पहाड़ पर बिताई एक शाम
घाटियों में घिरती धुँध
हवाओं पर लिखा तुम्हारा नाम
दूर-दूर तक फैला
हरियाला आँचल
कल्पना लोक में उड़ चला
मन पाखी चंचल
पहाड़ से उतर आई
लेकर पहाड़ की यादें तमाम
आँखों में बसी हैं
पहाड़ की ऊँची चोटियाँ
खुशबू से महकती घाटियाँ
घुमावदार पगडंडियाँ
पहाड़ का खुशनुमा मौसम
जोड़ता कितने रिश्ते अनाम
पहाड़ की धूप चटकीली
लगे साँझ दीवाली सी
सड़कें सैलानियों से गुलजार
बर्फीले मौसम में खाली सी
झरने बहते-बहते कहते
कितनी कहानियाँ गुमनाम ।


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