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11.17.2007
 
मेरा घर
मीना जैन

मेरा घर बहुत बड़ा है मेरा घर
और है यह अति सुंदर
रहते यहाँ माँ-पिताजी
मैं और मेरी दीदी रानी
साथ में रहते दादा-दादी
नीचे रहते चाचा-चाची
खूब खेलते हम छत पर
कभी-कभी बुआ भी आतीं
कहानी हमको खूब सुनातीं
सब बच्चों की टोली बनती
होली-दिवाली साथ मनती
खाते मिठाई जी भर कर
एक छोटा सा उपवन है
मेरे घर के आँगन में
फूलों के बीच बैठ जाते
इच्छा होती जब मन में
खिल उठते उमंग से भर
घर से जब दूर जाती हूँ
घर की याद बहुत आती है
अपना कमरा अपनी मेज
और भला कहाँ पाती मैं
खुश हो जाती घर लौट कर ।

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