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07.14.2007
 
कोयल
मीना जैन

 

कोयल

केवल अमराई में ही

तुम्हारे गीतों की गूँज रह जाए

सारे जग को मधुर गीतों से मधुरिम बनाना।

कोयल

उस  घर की मुँडेर पर जा बैठना

जहाँ मातृ-हीना शिशु-बालिका रोती हो

अपनी मीठी तान छेड़कर

वात्सल्य की थपकी देना।

कोयल

उस कमरे की खिड़की पर उड़ जाना

जहाँ पति-पत्नी में कलह हुई, सुलह न हुई

अपने मधु-गान सुनाकर

हृदय रस-रंजित कर देना

कोयल

उस मीनार की ऊपरी बुर्ज पर पहुँच जाना

जहाँ कोई निराश-हताश जीवन समाप्त करने आया

अपने स्वर का माधुर्य लुटाकर

जीवन अमोल समझा देना।

कोयल

उस गाँव के पीपल पर जाना

जिसकी छाँव में बैठे बाबूजी तकते परदेसी बेटे की राह

अपने गीतों के मधु आसव से

उनकी पीड़ा पर मरहम रखना 

कोयल

पत्र-विहीन ठूँठ पर एक बार अवश्य जाना

उसकी सूनी शाखाएँ दुलरा कर

अपने  मधुमय  संगीत  से

नव-जीवन संचरित कर आना।

कोयल

आतंकवादी ठिकाने के पास एक वृक्ष पर

अपना आश्रय बना लेना

अपने मधु कंठ से

हिंसा त्यागने का उनसे आग्रह  करना।

कोयल

तुम साधारण श्याम वर्ण तो क्या

तुम्हारी मधु वाणी जग में मधुरत्व भर सकती

अपने  मधु  मिश्रित  गीतों  से

द्‌भावना संदेश प्रसारित करना।



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