अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
07.07.2007
 
कहाँ गये वे लोग
मीना जैन

कहाँ गये वे लोग जिन्होंने
थामी थी स्वतंत्रता की मशाल
क्रांति का स्वर बनकर उभरा
विद्युत्कंप सा, जिनके शोणित का ज्वाल

जिये तो स्वतंत्रता का स्वप्न लिये
मरे तो भारत माँ के लिये
स्वतंत्रता के पथ पर जला दिये
प्रणेताओं ने प्राणों के दीये

फिरंगियों के लिये चुनौती भरा था
जिनके विद्रोह का रूप विकराल

जिन्होंने हिला दी शासन की नींव
उड़ा दी ब्रिटिश अफसरों की नींद
स्वतंत्रता का बीज बो दिया
धरती को अपने लहू से सींच

बलिदानियों को नमन करता
एक सौ पचास वर्षों का अंतराल

स्वाधीनता के ध्वज वाहक
प्रेरणा भर दो तुम प्राणों में
वही निष्ठा वही समर्पण
भर दो भारत के जन जन में

धन्य स्वतंत्रता सेनानी, जिनसे
गर्वित हुआ भारत माँ का भाल ।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें