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07.01.2008
 
घन बरसो मेरे आँगन में
मीना जैन


उमगी उमंगें फिर सावन में
घन बरसो मेरे आँगन में

ताल-तलैया में जल भर दो
हृदय आनंदित कर दो
भर दो खुशियाँ कण-कण में
घन बरसो मेरे आँगन में

 तना है बादलों का वितान
धरती-अंबर गा रहे गान
दामिनी दमक रही क्षण-क्षण में
घन बरसो मेरे आँगन में

फूट पड़े अंकुर धरणी से
कविता कहता भ्रमर कली से
खुशबू उड़ रही भीगी पवन में
घन बरसो मेरे आँगन में

प्रेम संदेसा घर-घर पहुँचा दो
सबको रिमझिम का गीत सुना दो
रंग भर दो सबके जीवन में
घन बरसो मेरे आँगन में


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