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| 07.01.2008 |
| घन बरसो मेरे आँगन में मीना जैन |
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उमगी उमंगें फिर सावन में
ताल-तलैया में जल भर दो
तना है बादलों का वितान
फूट पड़े अंकुर धरणी से
प्रेम संदेसा घर-घर पहुँचा दो |
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