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| 09.22.2007 |
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बादल से बातें करती हूँ मीना जैन |
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कभी-कभी
मैं बादल से बातें करती हूँ हरर-हरर
चली पुरवाई
सोंधी-सोंधी मिट्टी की खुशबू मेरे मन के
आँगन में नेह भरा
संस्पर्श कोई सागर,
सूरज, बादल, पानी जल-जलधर
का निराला खेल |
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