मिट्टी मीना चोपड़ा
अपनी खोई हुई जड़ों को आकाश में ढूँढा मैंने। नज़र की रफ़्तार रुक गई है इस गंदुमी नीले रंग के बीच कहीं। यहाँ से आगे रोशनी बढ़ती नहीं मिटती है।
मिट्टी की सुगंध धरती से उठकर मेरे जिस्म के हर कोने में जम गई है। मुझे पकड़कर सटा-सटा कर अपने करीब रखती है।
मैं कहीं बावली तो नहीं जड़ों को अपनी आसमानों में ढूँढती हूँ।