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04.28.2007
 
एक स्पर्श
मीना चोपड़ा

यहीं से उठता है
वह नगाड़ा
वह शोर
वह नाद
जो हिला देता है
पत्थरों को
झरनों को
आकश को
वही सब जो मुझमें
धरा है।
सिर्फ़ नहीं है
तो एक स्पर्श
जहाँ से यह सब
उठता है।

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