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| 04.28.2007 |
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अवशेष मीना चोपड़ा |
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वक्त खण्डित था,
युगों में और तब ! तुम्हीं
में अस्त और उदित मैं कुछ खाँचे
बच गए थे
उन्हीं में हमारी कहानी भी एक अंत! अविरल! और तब आँख
खुल गई कई टुकड़े ज़मीं पर बिखर गए। |
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