अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली

मुख पृष्ठ
02.27.2014


औरत

 ये वह शक्ति है जिसकी कोख में जीवन पनपता है
वो ताकत है, जो सितारों भरी क़ायनात को जन्म देती है,
जीवन को जगमगाहट और नज्जारों को इल्म देती है,
धरा पे उगते फूलों, पौधों और पेड़ों को सींच देती है
कहीं शबरी, कहीं मीरा, तो कहीं रानी झाँसी का रूप लेती है

ये औरत है जो रण में जाते वीरों को विजय तिलक देती है
ये औरत है, निर्भय है,
निर्भयता को जन्म देती है।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें