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02.23.2008
 

याद तुम्हारी आई
बी मरियम ख़ान


याद तुम्हारी आई

घिर के घटा सावन की आई
कली कली मुस्काई
रिमझिम रिमझिम बरसे बादल
पवन चली पुरवाई

याद तुम्हारी आई

जीवन तुम बिन सूना साजन
अखियाँ नीर बहाएँ
सखियों ने जब गाया सावन
ली मन ने अँगड़ाई

याद तुम्हारी आई

आशा का मैं मन मन्दिर में
तरसूँ दीप जला कर
हुआ अकार्थ जीवन मेरा
तुमसे नेह लगाकर
हाय यह तन्हाई

याद तुम्हारी आई

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