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| 04.11.2009 |
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क्यूँ सूरत तेरी मन भायी |
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क्यूँ सूरत तेरी मन भायी
नैनों के चंचल सागर में लगन प्रीत की झलके, आग लगा कर मन मंदिर में, दिल धड़का हल्के हल्के, ये रातों की तन्हाई क्यूँ सूरत तेरी मन भायी। नील गगन पर चंदा चमके चमके नन्हे तारे जोत दिखा कर झिलमिल झिलमिल थक कर डूबे सारे नींद न हमको आयी क्यूँ सूरत तेरी मन भायी |
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