| अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली |
![]() |
मुख्य पृष्ठ |
| 04.11.2009 |
|
कहाँ |
|
पैदा हुए कहाँ
पले-बढ़े कहाँ सँभाला होश कहाँ जवां हुए कहाँ नौकर हुए कहाँ शादी हुई कहाँ जाकर बसे कहाँ न जाने मरें कहाँ? और दफ़न हों कहाँ यही कहाँ कहाँ, है दस्तूर-ए-जहां कहते हैं जिसे, ज़िन्दगी की दास्तां |
| अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें
|