मधुर मधुर जीवन के सपने
आग लगा हृदय में अपने
आई तुम्हारे द्वार
क्यों रूखा है व्यवहार
कब से रही पुकार
देखी जब से मोहिनी मूरत
भोली भाली प्यारी सूरत
बैठी सब कुछ हार
क्यों रूखा है व्यवहार
कब से रही पुकार
आशाओं का दीप जला कर
अरमानों का थाल सजा कर
खड़ी तुम्हारे द्वार
क्यों रूखा है व्यवहार
कब से रही पुकार
प्रीत लगा कर हम पछताए
गीत विरह के दिल ने गाए
सोया सब संसार
क्यों रूखा है व्यवहार
कब से रही पुकार