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02.23.2008
 

कब से रही पुकार
बी मरियम ख़ान


मधुर मधुर जीवन के सपने
आग लगा हृदय में अपने
आई तुम्हारे द्वार
                 क्यों रूखा है व्यवहार
                 कब से रही पुकार

देखी जब से मोहिनी मूरत
भोली भाली प्यारी सूरत
बैठी सब कुछ हार
                क्यों रूखा है व्यवहार
                कब से रही पुकार

आशाओं का दीप जला कर
अरमानों का थाल सजा कर
खड़ी तुम्हारे द्वार
                क्यों रूखा है व्यवहार
                कब से रही पुकार

प्रीत लगा कर हम पछताए
गीत विरह के दिल ने गाए
सोया सब संसार
                क्यों रूखा है व्यवहार
                कब से रही पुकार


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