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| 05.31.2008 |
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हो शुभ बहुत ये साल नया
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हो शुभ बहुत ये साल नया
वो बीत गया जो साल गया मुंडेर की ओट से हाथ हिलाता पीछे छूटा जो साल गया हो शुभ बहुत ये साल नया दुख का दरिया पार किया और खुशी के भी दो सीप चुने दो पल खुशियाँ, ढेरों आँसू हो कर मालामाल गया गुज़र गया जो साल गया कई सपने टूटे शाखों पर कई रातें बीती आहें भर माथे की सिलवट, सूजी आँखें ले कर अपना हाल गया गुज़र गया जो साल गया पूरा हो हर स्वप्न सुहाना सच्चा हो अब ख्वाब पुराना नये जहाँ में नयी उमंग से बनेगा अब चौपाल नया वो बीत गया जो साल गया हो शुभ बहुत ये साल नया |
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