अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
 

हे प्रियतम (हाइकु)
मानोषी चैटर्जी


हे प्रियतम
अद्‌भुत छवि बन
सुन्दरतम

बसे हो तुम
मन मन्दिर में
आराध्य बन

भ्रमर जैसे
पागल बन ढूँढू
मैं पुष्पवन

तुम झरना
मैं इन्द्रधनुष के
रंगीन कण

चंचलता मैं
ज्यों अल्हड़ लहर
सागर तुम

तुम विशाल
अनंत युग जैसे
मैं एक क्षण

हो तरुवर
अडिग धीर स्थिर
तो मैं पवन

जैसे ललाट
और कोरी बिन्दिया
सजे चन्दन

हे प्रियतम....


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें