मानोषी चैटर्जी


कविता

आज कुछ माँगती हूँ प्रिय...
ऐ रात संभल कर चल जरा
फागुन (हाइकु)
बादल
लौ और परवाना
हे प्रियतम (हाइकु)
हो शुभ बहुत ये साल नया

कहानी

वो एक दिन

लघुकथा

बदलाव

दीवान

दुआ में तेरी असर हो कैसे
मुझको अपना एक पल ...
हज़ार क़िस्से सुना रहे हो
हम ज़िन्दगी के साथ चलते चले गये