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04.02.2014


ज़िन्दगी को खेल की तरह खेला कर बेटा

ज़िन्दगी को खेल की तरह खेला कर बेटा,
जीत हमेशा तेरी ही होगी,
खेल भी तो ऐसे की बस खेल का लुफ्त उठा,
स्कोर की परवाह मत कर,
स्कोर की परवाह करेगा तो,
दबाव में आ जायेगा, सचिन तेंदुलकर की तरह,
और नव्वे पार करके भी,
बहुत सारे गेंद बर्बाद करेगा और
सैंकड़ा पूरा नहीं कर पयेगा,
क्या फायदा? हार भी तो हो जायेगी,
इसीलिये कहता हूँ, स्कोर की परवाह मत कर,
सिर्फ़ खेलने का लुफ्त उठा.......
जीत हमेशा तेरी ही होगी,

खेल भावना का सम्मान कर,
अगर हार भी जाए तो दुखी मत हो,
फिर कोशिश कर, जीत निस्संदेह तुम्हारी ही होगी,
ज़िंदगी बहुत तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ रही है ना बेटा,
हर कोई एक- दूसरे से आगे निकलने में लगा हुआ है,
ऐसे में तू सौरभ गांगुली की तरह आक्रामक बन,
बाकी खेल के गुण तो तू सीख ही जयेगा, खेलते-खेलते,
बस द्रविड़ की तरह शांत रहना सिख ले...
जीत तुम्हारी ही होगी.

देख बेटे, जब तक तू दूसरों के स्कोर से अपनी तुलना करते रहेगा,
जीत तेरे से दूर ही रहेगी, ध्यान एकाग्रचित नहीं ना कर पायेगा तू,
तू अपने खेल में मस्त रह, औरों की तरफ़ देखना बंद कर,
फिर जीत सिर्फ़ तुम्हारी ही होगी......
ज़िंदगी को खेल की तरह खेल बेटा, जीत तुम्हारी ही होगी


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