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12.02.2014


लड़कियाँ

उत्तम स्त्री गुणों से संपन्न,
कुछ जहीन लड़कियाँ,
रास्ते में चलते हुए,
लड़खड़ा जाती हैं कभी-कभी,
और शालीन सहारे को पाकर,
प्रफ्फुलित भी हो जाती हैं,
नहीं पढ़ पातीं, कई बार सही तरह से,
आँखों में छपी भाषा किसी शख़्स के,
कभी कुछ छोटी, कभी बड़ी गलतियाँ कर जाती हैं,
ये लड़कियाँ डाल पर लगे,
ख़ूबसूरत फूलों की तरह होती हैं,
जो हवा के झोंकों के साथ,
कभी ऊपर, कभी नीचे, हिलती, डोलती, इतराती,
इसे अपनी आज़ादी, समझ,
ख़ुशी से झूम जाती हैं,
ये लड़कियाँ,
पसंद नहीं इन्हें,
ख़ुद को, तोड़ा जाना,
मुरझाना, या सूख कर बिखर जाना,
हर बार हाथ बढ़ाने वालों के,
हाथों को छूकर दूर झिटक जाना,
अच्छा लगता है,
खूब ठठाकर हँसती हैं,
जब ऐसा होता है,
बिल्कुल इस सच से अनभिज्ञ,
की जिस छोटे कद डाल पर लगी हैं ये,
उसकी ऊँचाई, इतनी नहीं होती,
की ज़िद्द पर अड़ा कोई हाथ,
इन्हें तोड़ ना ले,
हवा के झोंके भी हरदम साथ कहाँ देते है?


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