मनोरंजन कुमार तिवारी

कविता
अंकुर
अनगढ़ कविता
ऐसा क्यों होता है
कविता सी कुछ
क्या तुम नहीं हो कहीं मेरे उलझे धागे के गोले में
खो गई हैं मेरी कविताएँ कहीं
चरित्रहीन
ज़िन्दगी को खेल की तरह खेला कर बेटा
थके हुए लोग
दिल पर ले यार
प्रकृति
माँ भी झूठ बोलती है
मेरी कविता
मैं कवि नहीं हूँ
लड़कियाँ