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04.26.2014


मधुमास है छाया चलो प्रिये.....

यौवन बसंत के स्वागत में,
आमंत्रण दे - दे बुला रहा ।
मधुमास है छाया चलो प्रिये,
वीणा के तारों को छेड़ें ।

मधुमास है छाया चलो प्रिये.....

वह आम्रकुंज सरिता तीरे,
वह जल क्रीड़ा की उथल-पुथल ।
नीलम नक्षत्र चुनरी ओढ़े,
चंदा नभ से है बुला रहा ।

मधुमास है छाया चलो प्रिये.....

प्रेम - दीप प्रज्ज्वलित करके,
फिर सरिता तट से बहायेंगे ।
हम प्रकृति की सुशमा देख-देख,
आह्लादित मन से गायेंगे ।

मधुमास है छाया चलो प्रिये.....

मैं गीत लिखूँगा प्यार भरे,
नयनों में डूब - डूब कर के ।
तू राग रागिनी में खो कर,
स्वर को बिखराना प्राण प्रिये ।

मधुमास है छाया चलो प्रिये.....

कोहरे ने जीवन सरिता को,
अदृष्य किया है नयनों से ।
हम नव प्रभात की किरणों से,
उजियारा जग में बिखरायें ।

मधुमास है छाया चलो प्रिये.....

भयभीत न होंगे सागर से,
हम उसको मित्र बनायेंगे ।
तल में जो मोती छिपे पड़े,
हम उन्हें खोज कर लायेंगे ।

मधुमास है छाया चलो प्रिये.....

पलकों ने आज प्रतीक्षा में,
आँखों की नींद उड़ाई सखे ।
कचनार खिली है मधुवन में,
फिर दरश मिलन हुलसाई सखे ।

मधुमास है छाया चलो प्रिये.....


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