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05.03.2012
 

ये तो तय है मुश्किल से अपना मुँह खोलेगा
मनोज अबोध


ये तो तय है मुश्किल से अपना मुँह खोलेगा
लेकिन जब मुँह खोलेगा तो बस, सच बोलेगा

मुझसे बहुत बड़ा है लेकिन उसकी ख़ूबी है
जब तोलेगा मुझको खुद से ज्यादा तोलेगा

है मुझको विश्वास, कहूँगा जब भी चलने को
बिन कुछ पूछे-मुस्काकर मेरे सँग हो लेगा

जाते-जाते हाथ हिलाकर मुस्काएगा, पर
आँखों से ओझल होते ही जी भर रो-लेगा

वैसे उसको रूठ के जाना अच्छा लगता है
मैं जागूँगा तो वो कैसे तनहा सो लेगा


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