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05.03.2012
 

मिलके चलना बहुत ज़रूरी है
मनोज अबोध


मिलके चलना बहुत ज़रूरी है
अब सँभलना बहुत ज़रूरी है

गुत्थियाँ हो गईं जटिल कितनी
हल निकलना बहुत ज़रूरी है

आग बरसा रहा है सूरज अब
दिन का ढलना बहुत ज़रूरी है

जड़ न हो जाएँ चाहतें अपनी
हिम पिघलना बहुत ज़रूरी है

हम निशाने पे आ गए उसके
रुख़ बदलना बहुत ज़रूरी है

है अँधेरा तो प्यार का दीपक
मन में जलना बहुत ज़रूरी है


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